
Antriksh Ki Gandh Chandra-Dhul, Taron Aur Brahmand Ki Adrishya Rasayan-Katha
अंतरिक्ष को मनुष्य ने हमेशा आँखों से देखा है। रात के आकाश में चमकते तारे, चाँद की चाँदी-सी रोशनी, ग्रहों की धीमी चाल, आकाशगंगाओं की धुंधली चमक और दूरबीनों (Telescopes) से मिली अद्भुत तस्वीरों ने हमारी कल्पना को हजारों वर्षों से जगाए रखा है। लेकिन ब्रह्मांड केवल देखने की वस्तु नहीं है। वह पदार्थ, धूल, गैस, बर्फ, धातु, विकिरण (Radiation), अणुओं (Molecules), रासायनिक संकेतों (Chemical Signatures) और अदृश्य प्रक्रियाओं से भरा हुआ है। जब हम पूछते हैं कि अंतरिक्ष कैसा महकता है, तो यह प्रश्न पहले सुनने में अजीब लगता है, पर धीरे-धीरे यह प्रश्न हमें अंतरिक्ष यात्रियों, चंद्र-धूल, धूमकेतुओं, मंगल, शनि के चंद्रमा टाइटन, तारों के जन्म-स्थानों और जीवन की उत्पत्ति तक ले जाता है। यह केवल गंध का प्रश्न नहीं रह जाता; यह प्रश्न बन जाता है कि ब्रह्मांड का पदार्थ मनुष्य के अनुभव से कैसे जुड़ता है। खुला अंतरिक्ष मानव नाक के लिए सुरक्षित स्थान नहीं है। कोई मनुष्य अंतरिक्ष में अपना हेलमेट खोलकर साँस नहीं ले सकता, क्योंकि वहाँ न पृथ्वी जैसा वायुदाब (Air Pressure) है, न साँस लेने योग्य वायु, न वह वातावरण जिसमें गंध के अणु नाक तक पहुँच सकें। गंध तभी महसूस होती है जब अणु हवा में चलकर नाक के अंदर पहुँचते हैं और वहाँ की संवेदनाओं (Receptors) को छूते हैं। इसलिए अंतरिक्ष को सीधे सूँघना असंभव और घातक है। फिर भी अंतरिक्ष पूरी तरह खाली नहीं है। वहाँ धूल है, गैसें हैं, बर्फीले कण हैं, धात्विक सतहें हैं, सौर-वायु (Solar Wind) है, विकिरण है, और ऐसे रासायनिक पदार्थ हैं जो सही परिस्थितियों में गंध से जुड़े अनुभव पैदा कर सकते हैं। मनुष्य अंतरिक्ष को सीधे नहीं सूँघता, बल्कि अंतरिक्ष से छूकर लौटे पदार्थों, सूटों, उपकरणों, नमूनों और वैज्ञानिक यंत्रों के माध्यम से उसकी गंध की कल्पना और पहचान करता है।
Product details
- Author
- Tara Sahni Dr Vijay Kumar
- Publisher
- Gaurav Book Centre Pvt Ltd
- Brand
- Universal reads
- Language
- Hindi
- Print length
- 186 pages
- Edition
- First Edition
- Publication date
- 2026
- Genre
- Education
- Condition
- New